Solar system , saurmandal notes in Hindi .


दोस्तों आज हम आपके लिए  Solar system , saurmandal  notes in Hindi में लेकर आए है , जो   Competitive exams के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है |

इस Solar system , saurmandal  notes in Hindi में  ऐसे Topics पर फोकस किया गया है जो Competitive exams की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है | इस नोट्स को तैयार करने में विभिन बुक्स का प्रयोग किया गया है जिससे आपको एकदम सही और सटीक जानकारी प्रदान कराई जा सके , और जो  आपके Competitive exams के लिए उपयोगी साबित हो  |


सौरमंडल


सूर्य के चारो ओर चक्कर वाले विभिन्न ग्रहों ,क्षुद्रग्रहों ,धूमकेतुओं, उल्काओ तथा अन्य आकाशीय पिंडो के समूह को सौर मंडल कहते है |

सौरमंडल में सूर्य का प्रभुत्व है क्योकि सौरमंडल निकाय के द्रव्य का लगभग 99.999 द्रव्य सूर्य में निहित है सौर मंडल के समस्त ऊर्जा का स्रोत भी सूर्य ही है |

सूर्य –


सूर्य सौरमंडल का प्रधान है यह हमारी मन्दाकिनी दुग्ध मेघला के केंद से लगभग 30,000 प्रकाशवर्ष की दूरी पर स्थित है ||

यह दुग्ध मेघला मन्दाकिनी के केंद के चारो ओर 250km/सेकंड की गति से परिक्रमा कर रहा है इसका परिक्रमण काल 25 करोड़ (250मिलियन ) वर्ष है जिसे ब्रह्माण्ड वर्ष कहते है सूर्य अपने अक्ष पर पूर्व से पश्चिम की ओर घुमता है इसका मध्य भाग 25 दिनों में व ध्रुवीय भाग 35 दिनों में एक घूर्णन करता है |

सूर्य एक गैसीय गोला है जिसमे हाइड्रोजन 71% हीलियम 26.5% और अन्य तत्व 2.5% है सूर्य का केंद्रीय भाग क्रोड(core) कहलाता है जिसका ताप 1.5×10^7 डिग्री सेल्सियस होता है सूर्य की बाहरी सतह का तापमान 6000 डिग्री सेल्सियस होता है | 


सूर्य के दीप्तिमान सतह को प्रकाशमंडल कहते है सूर्य के किनारे प्रकाशमान नही होते क्योकि सूर्य का वायुमंडल प्रकाश का अवशोषण कर लेता है इसे वर्णमंडल कहते है ये लाल रंग का होता है | 

सूर्य ग्रहण के समय दिखाई देने वाले भाग को सूर्य किरीट (corona) कहते है सूर्य किरीट x-ray उत्सर्जित करता है इसे सूर्य का मुकुट कहा जाता है पूर्ण सूर्य ग्रहण के समय सूर्य किरीट से प्रकाश की प्राप्ति होती है |



सूर्य की उम्र - 5 बिलियन वर्ष |

भविष्य में सूर्य द्वारा ऊर्जा देते रहने का समय 10^11वर्ष है |

सूर्य की किरणे पृथ्वी तक पहुचने में 8 मिनट 16.6 सेकंड का समय लेती है |

सौर ज्वाला को उत्तरी ध्रुव पर औरोरा बोरिलियस तथा दक्षिणी ध्रुव पर औरोरा औस्ट्रेलिस कहते है |


सूर्य के धब्बे का तापमान आसपास के तापमान से 1500 डिग्री सेल्सियस कम होता है सूर्य के धब्बो का एक चक्र 22 वर्षो का होता है पहले 11 वर्षो तक धब्बा बढ़ता है फिर 11 वर्ष तक धब्बा घटता है जब सूर्य की सतह पर धब्बा दिखाई पड़ता है उस समय पृथ्वी पर चुम्बकीय झंझावात उत्पन्न होते है इससे चुम्बकीये सुई की दिशा बदल जाती है और रेडियो टी.वी . बिजली चालित मशीन आदि में गड़बड़ी उत्त्पन्न होती है |

सूर्य का व्यास 13 लाख 92 हज़ार km है जो पृथ्वी के व्यास का 110 गुना है |

सूर्य हमारी पृथ्वी से 13 लाख गुना बड़ा है और पृथ्वी को सूर्य ताप का 2 अरबवां भाग मिलता है |


ब्रह्माण्ड के बारे में बदलता हमारा दृष्टिकोण -

भू-केंद्रीय सिद्धान्त –


इसमें पृथ्वी को ब्रह्माण्ड का केंद्र माना गया था ,जिसकी परिक्रमा सभी आकाशीय पिंड विभिन्न कक्षाओं में करते थे इसका प्रतिपादन मिस्र के खगोल शाश्त्री कलाडियस टालमी ने 140 ई. में किया था |

सूर्य-केंद्रीय सिद्धान्त –


पोलेंड के खगोलशास्त्री निकोलस कापरनिकस (1473-1543ई.) ने दर्शाया सूर्य ब्रह्माण्ड के केंद्र पर है और ग्रह इसकी परिक्रमा करते है इस प्रकार सूर्य ब्रह्माण्ड का केंद्र बन गया इसे सूर्य केंद्रीय सिद्धान्त कहते है |

16वी शताब्दी में जोहानेस कैप्लर (1571-1630) ने ग्रहीय कक्षा के नियमो की खोज की परन्तु इन्होने ने भी सूर्य को ब्रह्माण्ड का केंद्र माना |

20वीं शताब्दी के आरंभ में जाकर हमारी मंदाकिनी दुग्ध्मेघला की तस्वीर स्पष्ट हुई | सूर्य को इस मंदाकिनी के एक सिरे पर अवस्थित पाया गया | इस प्रकार सूर्य को ब्रह्मांड के केंद्र पर होने का गौरव समाप्त हो गया |

सौरमंडल के पिंड -

अन्तर्राष्ट्रीय खगोलशाश्त्रीय संघ (INTERNATIONAL ASTRONOMICAL UNION- IAU) की प्राग सम्मलेन 2006 के अनुसार सौरमंडल में मौजूद पिंडो को तीन भागो में बांटा गया है

परमपरागत ग्रह –

 बुध, शुक्र, पृथ्वी ,मंगल ,बृहस्पति ,शनि ,अरुण और वरुण |

बौने ग्रह – 

प्लूटो ,चेरान, सेरस, 2003 यूबी 313 |

लघु सौरमंडलीय पिंड – 

धूमकेतु ,उपग्रह , और अन्य छोटे खगोलीय पिंड |

ग्रह –


ग्रह वे खगोलीय पिंड है जो निम्न शर्तो को पूरा करते है |

1. जो सूर्य के चारों और परिक्रमा करते है |

2. उनमे पर्याप्त गुरुत्वाकर्षण बल हो जिससे वो गोल स्वरूप ग्रहण कर सके | 

3. उसके आस पास का क्षेत्र साफ हो , अन्य कोई खगोलीय पिंड न हो |

ग्रहों को दो भागो में विभाजित किया गया है |

1. पार्थिव या आतंरिक ग्रह (INNER PLANET)- बुध, शुक्र,पृथ्वी ,और मंगल |

2. बाह्य या बृहस्पतीय ग्रह (OUTER PLANET)- बृहस्पति, शनि अरुण और वरुण 

मंगल बुध शुक्र बृहस्पति शनि को नंगी आँखों से देखा जा सकता है |

आकार के आधार पर ग्रहों का क्रम 

बृहस्पति > शनि > अरुण > वरुण > पृथ्वी >शुक्र > मंगल > बुध

सूर्य से दूरी के आधार पर ग्रहों का क्रम निम्न है |

बुध, शुक्र ,पृथ्वी ,मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण ,वरुण |

शुक्र और वरुण को छोड़कर अन्य सभी ग्रह का घूर्णन पश्चिम से पूर्व है और शुक्र और वरुण का घूर्णन पूर्व से पश्चिम है |

ग्रह

बुध (MERCURY) -



बुध


1.यह सूर्य के सबसे नजदीक का ग्रह है जो सूर्य निकलने के 2 घंटा पहले दिखाई देता है |

2. यह सबसे छोटा ग्रह है तथा इसके पास कोई उपग्रह नही है |

3. विशिष्ट गुण- इसमें चुम्बकीय क्षेत्र का होना |

4. यह सूर्य की परिक्रमा सबसे कम समय में करता है अर्थात ये सबसे अधिक कक्षीय गति वाला ग्रह है |

5. यहाँ दिन अति गर्म तथा रात अति बर्फीली होती है इसका तापान्तर (600 डिग्री सेल्सियस )सबसे अधिक है | इसका तापमान दिन में 427 डिग्री सेल्सियस तथा रात को तापमान -173 डिग्री सेल्सियस हो जाता है |


VENUS (शुक्र) -

शुक्र

यह पृथ्वी का सबसे पास का तथा सबसे चमकीला और सबसे गर्म ग्रह है |

इसे साँझ का तारा या भोर का तारा भी कहा जाता है क्योकि यह शाम में पश्चिम दिशा में तथा सुबह पूर्व दिशा में आकाश में दिखाई देता है |

यह अन्य ग्रहों के विपरीत दक्षिणावर्त चक्रण करता है |

इसे पृथ्वी का भागिनी ग्रह कहते है | यह घनत्व ,आकार तथा व्यास में लगभग पृथ्वी के सामान है| 

इसके पास कोई उपग्रह नही है |

JUPITER (वृहस्पति ) -



वृहस्पति

यह सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है यह अपनी धुरी पर सबसे कम समय 10 घंटे में चक्कर लगता है तथा सूर्य की परिक्रमा करने में 12 वर्ष लगते है इसका उपग्रह गयानीमीड सभी उपग्रहों में सबसे बड़ा है इसका रंग पीला है |

MARS(मंगल)-



मंगल

इसे लाल ग्रह कहा जाता है इसका रंग लाल आयरन ऑक्साइड के कारण होता है |

यहाँ पृथ्वी के सामान दो ध्रुव है तथा इसका कक्षातली 25 डिग्री के कोण पर झुका है जिसके कारण यहाँ पृथ्वी के सामान ऋतु परिवर्तन होता है  |

इसके दिन का मान और अक्ष का झुकाव पृथ्वी के सामान है |

यह अपनी धुरी पर 24 घंटे में एक बार पूरा चक्कर लगाता है |

इसके दो उपग्रह है फोबोस और डीमोस |

सूर्य की परिक्रमा करने में इसे 687 दिन लगते है |

सौरमंडल का सबसे बड़ा ज्वालामुखी ओलिपस मेसी और सौरमंडल का सबसे ऊंचा पर्वत निक्स ओलम्पिया जो माउंट एवरेस्ट से तीन गुना ऊंचा है इसी ग्रह पर स्थित है |

भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संस्थान (ISRO) ने अपना मंगलयान 5 नवम्बर 2013 को श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश ) से ध्रुवीय अन्तरिक्ष प्रक्षेपणयान PSLV-C-25 से प्रक्षेपित किया |

शनि(Saturn) -

शनि

यह आकार में दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है |

इसकी विशेषता है – इसके तल के चारो और वलय का होंना है (मोटी प्रकाश वाली कुंडली ) वलय की संख्या 7 है | यह आकाश में पीले तारे के सामान दिखाई पड़ता है |

शनि का सबसे बड़ा उपग्रह टाइटन है जो सौरमंडल का दूसरा सबसे बड़ा उपग्रह है | यह आकर में बुध के बराबर है टाइटन |

की खोज डेनमार्क के खगोलशास्त्री क्रिश्चियन हाइजोन ने 1665 में की | यह एकमात्र ऐसा उपग्रह है जिसका पृथ्वी जैसा स्वयं का सघन वायुमंडल है |

फ़ोबे नामक शनि का उपग्रह इसकी कक्षा में घुमने की विपरीत दिशा में परिक्रमा करता है |

इसका घनत्व सभी ग्रहों और जल से भी कम है यानी इसे जल में रखने पर तैरने लगेगा |

अरुण( URANUS)-

अरुण

यह आकार में तीसरा सबसे बड़ा ग्रह है इसका तापमान -215 डिग्री सेल्सियस है

इसके चारों ओर नौ वलयो में पांच वलयो के नाम अल्फा, बीटा, गामा , डेल्टा और इप्सिलान है |

यह अपने अक्ष पर पूर्व से पश्चिम की ओर घूमता है |

यहाँ सूर्योदय पश्चिम की ओर और सूर्यास्त पूर्व की ओर होता है |

इसके सभी ग्रह भी पृथ्वी की विपरीत दिशा में परिभ्रमण करते है |

यह अपनी धुरी पर सूर्य की ओर इतना झुका हुआ है कि लेटा हुआ दिखाई पड़ता है इसीलिए इसे लेटा हुआ ग्रह कहा जाता है इसका सबसे बड़ा उपग्रह टाइटेनिया है |

वरुण(NEPTUNE)-

वरुण

इसकी खोज जर्मन खगोलशास्त्री जहान गाले ने की |

नई खगोलीय व्यवस्था में यह सूर्य से सबसे दूर स्थित है |

इसके चारों और अति शीतल मीथेन का बादल छाया हुआ है |

इसका प्रमुख उपग्रह ट्रिटोन है |

EARTH(पृथ्वी) -

EARTH

पृथ्वी आकार में पाँचवां सबसे बड़ा ग्रह है पृथ्वी का अक्ष उसके कक्षातल पर लम्ब से 23डिग्री 30 मिनट झुका हुआ है ,दुसरे शब्दों में पृथ्वी का अक्ष पृथ्वी के कक्षातल से 66डिग्री 30 मिनट का कोण बनाता है |

यह सौरमंडल का एकमात्र ग्रह है जिसपर जीवन है, इसका एकमात्र उपग्रह चन्द्रमा है |


इसका विषुवतीयव्यास 12,756 km और ध्रुवीय व्यास 12,714 km है |

यह अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व 1610 km/घंटा की चाल से 23 घंटे 56 मिनट और 4 सेकंड में एक पूरा चक्कर लगाती है पृथ्वी की इस गति को घूर्णन गति या दैनिक गति कहते है इस गति से दिन और रात होते है |

पृथ्वी को सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करने में 365दिन 5 घंटे 48 मिनट 46 सेकंड (लगभग 365 दिन 6 घंटे ) का समय लगता है |

इस समयावधि के दौरान परिक्रमा पूरी करने में पृथ्वी का माध्य वेग लगभग 30km/सेकंड (29.8 km/सेकंड) होता है |

सूर्य के चारो ओर`पृथ्वी के इस परिक्रमा को पृथ्वी की वार्षिक गति या परिक्रमण कहते है पृथ्वी को सूर्य की एक परिक्रमा करने में लगे समय को सौर वर्ष कहा जाता है |

पृथ्वी पर ऋतु परिवर्तन , इसकी अक्ष पर झुके होने के कारण तथा सूर्य की सापेक्ष इसकी स्थिति में परिवर्तन यानी वार्षिक गति के कारण होता है वार्षिक गति के कारण ही पृथ्वी पर दिन और रात -छोटा –बड़ा होता है |

आकार और बनावट की दृष्टि से पृथ्वी शुक्र के सामान है |

जल की उपस्थिति के कारण इसे नीला ग्रह भी कहा जाता है |

चन्द्रमा (MOON) -


चन्द्रमा की सतह और उसकी आन्तरिक स्थिति का अध्ययन करने वाला विज्ञान सेलेनोलोजी कहलाता है |

चन्द्रमा पर धूल के मैदान को शांति सागर कहते है यह चंद्रमा का पिछला भाग है ,जो अंधकारमय होता है |

चन्द्रमा को जीवाश्म ग्रह भी कहते है |

चंद्रमा पृथ्वी की एक परिक्रमा लगभग 27 दिन 8 घंटे में पूरी करता है और इतने ही समय में अपने अक्ष पर एक घूर्णन करता है यही कारण है कि चन्द्रमा का सदैव एक ही भाग दिखाई देता है | पृथ्वी से चंद्रमा का 57% भाग देख सकते है


चन्द्रमा का अक्ष पृथिवी तल के साथ 58.48 डिग्री का अक्ष कोण बनाता है चन्द्रमा पृथ्वी के अक्ष के लगभग समान्तर है इसका परिक्रमण पथ भी दीर्घ वृत्ताकार है |

चन्द्रमा का व्यास 3,480 km तथा द्रव्यमान ,पृथ्वी के द्रव्यमान का लगभग 1/81 है |

सूर्य के सन्दर्भ में चंद्रमा की परिक्रमा की अवधि 29.53 दिन (29 दिन 12 घंटे 44 मिनट और 2.8 सेकंड ) है इस समय को चंद्रमास या साइनोडिक मास कहते है |

ज्वार उठने के लिए अपेक्षित सौर और चन्द्रमा की शक्तियों का अनुपात 11:5 है |

अपोलो के अन्तरिक्ष यात्रियों द्वारा लाये गए चट्टानों से पता चला है कि चन्द्रमा भी उतना पुराना है जितना पृथ्वी (460 करोड़ वर्ष ) | इन चट्टानों में टाइटेनियम अधिक मात्रा में है |

सुपर मून -


जब चन्द्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है तो उस स्थिति को सुपर मून कहते है इसे पेरिजी फुल मून भी कहते है इसमें चाँद 14% ज्यादा बड़ा और 30% अधिक चमकीला होता है |

ब्लू मून –


एक कैलेन्डर माह में दो पूर्णिमा हो तो दूसरी पूर्णिमा का चाँद ब्लू मून कहलाता है | इसका कारण दो पूर्णिमा के बीच अंतराल 31 दिनों से कम होना है | ऐसा 2-3 साल पर होता है |

लघु सौरमंडलीय पिंड -

क्षुद्र ग्रह (ASTEROIDS) –


मंगल और बृहस्पति ग्रह की कक्षाओ के बीच कुछ छोटे छोटे आकाशीय पिंड है जो सूर्य की परिक्रमा कर रहे है उसे क्षुद्र ग्रह कहते है खगोलशास्त्रियो के अनुसार ग्रहों के विस्फोट के फलस्वरूप टूटे टुकड़े से क्षुद्र ग्रहों का निर्माण हुआ है |

क्षुद्र ग्रह जब पृथ्वी से टकराता है तो पृथ्वी के पृष्ठ पर विशाल गर्त ( लोनार झील – महाराष्ट्र) बनता है |

धूमकेतु (COMET)-


सौरमंडल के छोर पर बहुत छोटे छोटे अरबो पिंड विद्यमान है जो धूमकेतु या पुच्छल तारे कहलाते है यह गैस और धूल का संग्रह होते है , जो आकाश में लम्बी चमकदार पूंछ सहित प्रकाश के चमकीले गोले के रूप में दिखाई देते है धूमकेतु केवल तभी दिखाई देते है जब वो सूर्य की ओर अग्रसर होते है क्योकि सूर्य की किरण इन गैसो को चमकीला बना देती है | धूमकेतु की पूंछ हमेशा सूर्य से दूर होता दिखाई देती है |

उल्का (METEORS)-


उल्काए प्रकाश की चमकीली धारी के रूप में दिखाई देती है जो आकाश में क्षण भर के लिए दमकती है और लुप्त हो जाती है | उल्काए क्षुद्र ग्रहों के टुकडो तथा धूमकेतुओ द्वारा पीछे छोड़े गये धूल के कण होते है |


प्रकाश चक्र (CIRCLE OF ILLUMINATION) –


वैसी काल्पनिक रेखा जो पृथ्वी के प्रकाशित और अप्रकाशित भाग को बाटती है |

उपसौर और अपसौर -

उपसौर और अपसौर


पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा दीर्घ वृत्ताकार कक्षा में करती है जिसके फोकस पर सूर्य होता है जब पृथ्वी सूर्य के अत्यधिक पास होती है तो उसे उपसौर कहते है और जब पृथ्वी सूर्य से अधिकतम दूरी पर होती है तो उसे अपसौर कहते है| 

एपसाइड रेखा –


उपसौरिक और अपसौरिक को मिलाने वाली काल्पनिक रेखा सूर्य के केंद्र से गुजरती है |इसे एपसाइड रेखा कहते है |
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